18वीं सदी के अंत में ब्रिटिश साम्राज्य की दिलचस्पी बंबई में बढ़ने लगी। ब्रिटिश साम्राज्य ने 1768 में बंबई सिपाही की द्वितीय बटालियन बनाई। ब्रिटिश सेना मराठा सेना की चपलता से प्रेरित हुए। जल्द ही उन्होंने एक और बटालियन जोड़ी। इन बटालियनों (जिन्हें जंगी पलटन और काली पंचविन नाम दिया गया था) ने श्रीरंगपट्टनम, कन्नूर, सूरत और बलूचिस्तान में मशहूर लड़ाइयाँ लड़ीं। यह इकाईयां आज की मराठा लाइट इन्फैंट्री की प्रणेता हैं।
शिवाजी महाराज तोपख़ाने के अभाव से परेशान थे लेकिन उन्होंने इस अभाव को अनुकूलता में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने हल्की घुड़सवार सेना का उपयोग किया जिसने मज़बूत लेकिन मंथर गति वाली मुगल सेना को मात दे दी। मराठा सेना के पास हथियार कम थे और वह बहुत कम खाने में भी गुज़ारा कर सकती थी। यही कारण था कि मराठा सेना अत्यधिक गतिशील थी।
यही कारण था कि ‘द इंग्लिश लेटर’ ने 1664 में लिखा कि शिवाजी एक ही समय में इतने स्थानों पर उपस्थित रहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनका शरीर हवादार है और उन्होंने पंख लगा रखे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से मराठा लाइट इन्फैंट्री “बोला श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय” का रणहुंकार लगाती है।
यह अल्फ्रेड क्राउडी लवेट द्वारा बनाया गया मराठा लाइट इन्फैंट्री की चित्र है।
स्रोत – वेलोर एनश्राइन्ड, एम.जी. अभ्यंकर, शिवाजी, हिज़ लाइफ़ एंड टाइम्स, गजानन भास्कर मेहेंदले
18वीं सदी के अंत में ब्रिटिश साम्राज्य की दिलचस्पी बंबई में बढ़ने लगी। ब्रिटिश साम्राज्य ने 1768 में बंबई सिपाही की द्वितीय बटालियन बनाई। ब्रिटिश सेना मराठा सेना की चपलता से प्रेरित हुए। जल्द ही उन्होंने एक और बटालियन जोड़ी। इन बटालियनों (जिन्हें जंगी पलटन और काली पंचविन नाम दिया गया था) ने श्रीरंगपट्टनम, कन्नूर, सूरत और बलूचिस्तान में मशहूर लड़ाइयाँ लड़ीं। यह इकाईयां आज की मराठा लाइट इन्फैंट्री की प्रणेता हैं।
शिवाजी महाराज तोपख़ाने के अभाव से परेशान थे लेकिन उन्होंने इस अभाव को अनुकूलता में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने हल्की घुड़सवार सेना का उपयोग किया जिसने मज़बूत लेकिन मंथर गति वाली मुगल सेना को मात दे दी। मराठा सेना के पास हथियार कम थे और वह बहुत कम खाने में भी गुज़ारा कर सकती थी। यही कारण था कि मराठा सेना अत्यधिक गतिशील थी।
यही कारण था कि ‘द इंग्लिश लेटर’ ने 1664 में लिखा कि शिवाजी एक ही समय में इतने स्थानों पर उपस्थित रहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनका शरीर हवादार है और उन्होंने पंख लगा रखे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से मराठा लाइट इन्फैंट्री “बोला श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय” का रणहुंकार लगाती है।
यह अल्फ्रेड क्राउडी लवेट द्वारा बनाया गया मराठा लाइट इन्फैंट्री की चित्र है।
स्रोत – वेलोर एनश्राइन्ड, एम.जी. अभ्यंकर, शिवाजी, हिज़ लाइफ़ एंड टाइम्स, गजानन भास्कर मेहेंदले