अपने ‘गरीब’ पति शिव का अपने पिता द्वारा अनादर किए जाने के बाद सति ने आत्मदाह कर लिया । शिव ने उनकी मृत्यु के पश्चात कठोर ब्रह्मचार्य का पालन किया। प्रेम के देवता, काम देव, को शिव में पार्वती (जो पुनर्जन्मित सति थी) के प्रति प्रेम भाव जगाने का कार्य सौंपा गया। उन्होंने शिव को क्रोधित किया जिस कारण शिव ने उनको जला कर भस्म कर दिया। कामदेव की पत्नी, रति, के अनुरोध पर शिव ने उन्हें निराकार रूप में पुनर्जीवित किया। होली का त्योहार कामदेव के पुनर्जन्म का जश्न मनाती है। होली के एक दिन पहले होने वाले अलाव कामदेव के आहुति का प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों में वसंत उत्सव के सन्दर्भ में कामोत्सव और मदनोत्सव जैसे नाम कामदेव के साथ इसके सम्बन्ध को दर्शाते हैं। यह कहानी मध्य और दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित थी जबकि होलका की कहानी उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में अधिक प्रचलित थी। समय के साथ यह कहानी धुंधली पड़ गई है, लेकिन दक्षिण के कुछ क्षेत्रों में इसे आज भी याद किया जाता है। महाराष्ट्र के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में धुलिवन्दन त्योहार होली का भाग है। यह कामदेव की राख (धुली) और उसके पुनरुत्थान का जश्न (वंदन) मनाने को चिन्हित करता है।
स्रोत: नागराज पतुरी, https://indiafacts.org/holi-kaamotsava-age-old-hindu-festival-love/
The 1890 painting is Shiva burning Kamadeva.
अपने ‘गरीब’ पति शिव का अपने पिता द्वारा अनादर किए जाने के बाद सति ने आत्मदाह कर लिया । शिव ने उनकी मृत्यु के पश्चात कठोर ब्रह्मचार्य का पालन किया। प्रेम के देवता, काम देव, को शिव में पार्वती (जो पुनर्जन्मित सति थी) के प्रति प्रेम भाव जगाने का कार्य सौंपा गया। उन्होंने शिव को क्रोधित किया जिस कारण शिव ने उनको जला कर भस्म कर दिया। कामदेव की पत्नी, रति, के अनुरोध पर शिव ने उन्हें निराकार रूप में पुनर्जीवित किया। होली का त्योहार कामदेव के पुनर्जन्म का जश्न मनाती है। होली के एक दिन पहले होने वाले अलाव कामदेव के आहुति का प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों में वसंत उत्सव के सन्दर्भ में कामोत्सव और मदनोत्सव जैसे नाम कामदेव के साथ इसके सम्बन्ध को दर्शाते हैं। यह कहानी मध्य और दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित थी जबकि होलका की कहानी उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में अधिक प्रचलित थी। समय के साथ यह कहानी धुंधली पड़ गई है, लेकिन दक्षिण के कुछ क्षेत्रों में इसे आज भी याद किया जाता है। महाराष्ट्र के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में धुलिवन्दन त्योहार होली का भाग है। यह कामदेव की राख (धुली) और उसके पुनरुत्थान का जश्न (वंदन) मनाने को चिन्हित करता है।
स्रोत: नागराज पतुरी, https://indiafacts.org/holi-kaamotsava-age-old-hindu-festival-love/
The 1890 painting is Shiva burning Kamadeva.