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मानसून प्रश्नोत्तरी

वर्षा आ गई है, यद्यपि यह विलंबित और कमज़ोर रही है। वैदिक साहित्य के अनुसार वरुण जल के देवता हैं अपितु वर्षा कराने का दायित्व इन्द्र का है। इंद्र तो आज भी परिचित देवता हैं, किन्तु वरुण लगभग लुप्त हो चुके हैं। वरुण के गुण वेदों से लेकर बाद की दार्शनिक परंपराओं तक में मिलते हैं। इस प्रश्नोत्तरी में आइए, हम महान देवता वरुण का अन्वेषण करें। इस प्रश्नोत्तरी का स्रोत डॉ. उषा चौधरी का दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रस्तुत विस्तृत विद्या वाचस्पति शोध प्रबंध है, जिसका शीर्षक है – ‘भारतीय पौराणिक कथाओं में इन्द्र एवं वरुण’।

वरुण का शाब्दिक अर्थ है—‘वह जो आवृत करता है’। स्थूल रूप से यह वेदान्त की किस अवधारणा के अनुरूप है?

इन्द्र-वरुण द्वैत सांख्य दर्शन में भी प्रतिबिंबित होता है। यह कौन-सी द्वैतता है?

वरुण ‘ऋत’ अर्थात् प्रकृति की लय के रक्षक हैं। हिंदू धर्म की कौन-सी जानी-पहचानी अवधारणा प्रकृति की लय को बनाए रखने की इसी भूमिका को दर्शाती है?

जहाँ कहीं भी दो लोग मिलकर कोई गुप्त योजना बनाते हैं या कोई षड्यंत्र रचते हैं, और यह समझते हैं कि वह अकेले हैं, वहाँ राजा वरुण तीसरे व्यक्ति के रूप में उपस्थित रहते हैं और उनकी सभी योजनाओं को देखते तथा उनके साक्षी बनते हैं। यह सूक्त कहाँ मिलता है?

वरुण एक गुरु (शिक्षक) भी हैं। तैत्तिरीय उपनिषद में वह भृगु ऋषि को एक लोकप्रिय सिद्धांत की व्याख्या करते हैं। यह कौन-सा सिद्धांत है?

विष्णु का कौन-सा नाम ब्रह्मांडीय जल के स्वामी वरुण के नाम के समान है?

गीता में, कृष्ण स्वयं को नागों में ‘अनंत’ और नियंत्रण करने वालों में ‘यम’ बताते हैं। वे स्वयं को किस श्रेणी में ‘वरुण’ भी बताते हैं?

आयुर्वेद के अनुसार, वरुण जड़ी-बूटी किस रोग (पीड़ा) का इलाज है, जो जल के देवता के रूप में उनके चित्रण के अनुरूप है?

उस दिव्य धनुष का क्या नाम है जो वरुण ने अर्जुन को उपहार में दिया था?

हिंदू सिंधी समुदाय के किस आराध्य देव को वरुण का अवतार माना जाता है?

पारसियों के किस सर्वोच्च देवता के गुण वरुण से मिलते-जुलते हैं?

ऋग्वेद में वरुण और इंद्र के साथ किस देवता का उल्लेख मिलता है? उस देवता की पूजा प्राचीन रोम में भी की जाती थी।

निष्कर्ष (समापन टिप्पणी)
विद्वान कभी-कभी हिन्दू धर्म की वैदिक, औपनिषदिक और इतिहास-पुराण परंपराओं के बीच के अंतर (विरोधाभास) को रेखांकित करते हैं। लेकिन जैसा कि वरुण देव की यह गाथा दर्शाती है, दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों में एक निरंतरता विद्यमान रही है। वरुण देव विविध गुणों और विशेषताओं से जुड़े हुए हैं और यह सभी गुण आज भी भिन्न-भिन्न नामों और वैचारिक रूपरेखाओं के अंतर्गत विद्यमान हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि आज लगभग विस्मृत हो चुकी मित्र-वरुण की युगल जोड़ी (द्वैत) अवधारणा ने किसी समय लगभग सम्पूर्ण ज्ञात विश्व को गंभीरता से प्रभावित किया था।

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