मुगल किले प्राकृतिक वायुसंचार का प्रभावी ढंग से उपयोग करते थे। विशाल दीवार में एक छोटी खिड़की, जैसा कि हम अधिकांश मुगल इमारतों में देखते हैं, हवा को अधिक बल के साथ इमारत के अंदर प्रवेश करने देती है। अंदर की ओर कम चौड़ाई वाली नुकीली खिड़कियाँ भी प्रवेश करने वाली हवा की गति को बढ़ाती हैं।जब अधिक वेग वाली हवा किसी बड़े स्थान में प्रवेश करती है, तो अचानक विस्तार होने के कारण आंतरिक तापमान कम हो जाता है। गर्म हवा गुंबदनुमा स्थान में ऊपर उठती है और छत के पास बने छोटे निकास गर्म हवा को बाहर निकलने देते हैं।
चित्र में फतेहपुर सीकरी स्थित पाँच मंज़िला पंचमहल दिखाया गया है, जो नीचे से ऊपर की ओर क्रमशः छोटा होता जाता है, और जिसे अकबर की पत्नियों के लिए उनकी गर्मियों की शामों का आनंद लेने हेतु संचरित किया गया था। इसकी असममित संरचना निचले स्तरों पर प्राकृतिक वायुसंचार सुनिश्चित करता है। इसे कभी-कभी गलती से पवन मीनार समझ लिया जाता है।
स्रोत (पाठ एवं चित्र): आसिफ अली, “मुगल इमारतों में निष्क्रिय शीतलन”
मुगल किले प्राकृतिक वायुसंचार का प्रभावी ढंग से उपयोग करते थे। विशाल दीवार में एक छोटी खिड़की, जैसा कि हम अधिकांश मुगल इमारतों में देखते हैं, हवा को अधिक बल के साथ इमारत के अंदर प्रवेश करने देती है। अंदर की ओर कम चौड़ाई वाली नुकीली खिड़कियाँ भी प्रवेश करने वाली हवा की गति को बढ़ाती हैं।जब अधिक वेग वाली हवा किसी बड़े स्थान में प्रवेश करती है, तो अचानक विस्तार होने के कारण आंतरिक तापमान कम हो जाता है। गर्म हवा गुंबदनुमा स्थान में ऊपर उठती है और छत के पास बने छोटे निकास गर्म हवा को बाहर निकलने देते हैं।
चित्र में फतेहपुर सीकरी स्थित पाँच मंज़िला पंचमहल दिखाया गया है, जो नीचे से ऊपर की ओर क्रमशः छोटा होता जाता है, और जिसे अकबर की पत्नियों के लिए उनकी गर्मियों की शामों का आनंद लेने हेतु संचरित किया गया था। इसकी असममित संरचना निचले स्तरों पर प्राकृतिक वायुसंचार सुनिश्चित करता है। इसे कभी-कभी गलती से पवन मीनार समझ लिया जाता है।
स्रोत (पाठ एवं चित्र): आसिफ अली, “मुगल इमारतों में निष्क्रिय शीतलन”