एक मछली द्वारा सभ्यता को बचाने की कहानी सबसे पहले महाभारत में मिलती है। राजा मनु को एक छोटी सी मछली मिली, जिसने वादा किया कि यदि मनु उसकी रक्षा करेंगे तो वह उन्हें बचाएगी। मनु ने उसे पहले एक घड़े में रखा, और जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई, उसे तालाब, फिर नदी और अंत में समुद्र में छोड़ दिया।
मछली ने मनु को चेतावनी दी कि एक भयंकर प्रलय आने वाली है, इसलिए वे एक नाव बनाकर उसमें सवार हो जाएँ। जब महाप्रलय आया, तब उस मछली ने नाव को सुरक्षित रखा, जबकि बाकी सभी जीव नष्ट हो गए। अंत में मनु अकेले रह गए, तब मत्स्य अवतार ने उन्हें आशीर्वाद दिया और नई सृष्टि की शुरुआत करने में मदद की।
मत्स्य पुराण में कथा थोड़ी अलग है—यहाँ मछली पहले हयग्रीव नामक असुर से वेदों को बचाती है, और फिर राजा सत्यव्रत से मिलती है, जिसके बाद वही कहानी आगे बढ़ती है।
गुजरात के बेट द्वारका में मत्स्य भगवान का एक दुर्लभ मंदिर भी है, जो स्वयं एक बड़े जलप्रलय का साक्षी रहा, जिसमें भगवान कृष्ण का वंश समाप्त हो गया था। भारतीय कथा नूह की कहानी से थोड़ी अलग है, क्योंकि उसमें नाव पर अन्य जीवों को भी बचाया जाता है।
रोचक बात यह है कि प्रलय की कहानी लगभग हर प्राचीन सभ्यता में मिलती है, इसलिए संभव है कि यह कोई वास्तविक घटना रही हो। इसका सबसे प्राचीन उल्लेख तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में बेबीलोन की पट्टिकाओं और मेसोपोटामिया के ‘गिलगमेश’ महाकाव्य में मिलता है।
चित्र आंध्र प्रदेश के तिरुपति के पास नागलापुरम स्थित वेदनारायणस्वामी मंदिर का है, जहाँ भगवान विष्णु मत्स्य नारायण के रूप में विराजमान हैं।
एक मछली द्वारा सभ्यता को बचाने की कहानी सबसे पहले महाभारत में मिलती है। राजा मनु को एक छोटी सी मछली मिली, जिसने वादा किया कि यदि मनु उसकी रक्षा करेंगे तो वह उन्हें बचाएगी। मनु ने उसे पहले एक घड़े में रखा, और जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई, उसे तालाब, फिर नदी और अंत में समुद्र में छोड़ दिया।
मछली ने मनु को चेतावनी दी कि एक भयंकर प्रलय आने वाली है, इसलिए वे एक नाव बनाकर उसमें सवार हो जाएँ। जब महाप्रलय आया, तब उस मछली ने नाव को सुरक्षित रखा, जबकि बाकी सभी जीव नष्ट हो गए। अंत में मनु अकेले रह गए, तब मत्स्य अवतार ने उन्हें आशीर्वाद दिया और नई सृष्टि की शुरुआत करने में मदद की।
मत्स्य पुराण में कथा थोड़ी अलग है—यहाँ मछली पहले हयग्रीव नामक असुर से वेदों को बचाती है, और फिर राजा सत्यव्रत से मिलती है, जिसके बाद वही कहानी आगे बढ़ती है।
गुजरात के बेट द्वारका में मत्स्य भगवान का एक दुर्लभ मंदिर भी है, जो स्वयं एक बड़े जलप्रलय का साक्षी रहा, जिसमें भगवान कृष्ण का वंश समाप्त हो गया था। भारतीय कथा नूह की कहानी से थोड़ी अलग है, क्योंकि उसमें नाव पर अन्य जीवों को भी बचाया जाता है।
रोचक बात यह है कि प्रलय की कहानी लगभग हर प्राचीन सभ्यता में मिलती है, इसलिए संभव है कि यह कोई वास्तविक घटना रही हो। इसका सबसे प्राचीन उल्लेख तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में बेबीलोन की पट्टिकाओं और मेसोपोटामिया के ‘गिलगमेश’ महाकाव्य में मिलता है।
चित्र आंध्र प्रदेश के तिरुपति के पास नागलापुरम स्थित वेदनारायणस्वामी मंदिर का है, जहाँ भगवान विष्णु मत्स्य नारायण के रूप में विराजमान हैं।